Monday, September 29, 2008

29 सितम्बर - सड़क मरम्मत के लिए लोक निर्माण खंडों को 42 करोड़

सूबे की सड़कों की मरम्मत के लिए लोक निर्माण विभाग के सभी खंडों को 42 करोड़ रुपये की रकम आवंटित कर दी गई है। इस बार बारिश में राज्य में बड़े पैमाने पर सड़कों को क्षति पहुंची है। इससे वाहनों के आवागमन में परेशानी बढ़ गई है और अनेक जगहों पर परिवहन बाधित भी हो गया है। शासन ने विभाग को मार्गो को शीघ्र परिवहन योग्य बनाने केनिर्देश दिए हैं। सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि बारिश से इस वर्ष सड़कों को काफी नुकसान पहुंचा है। सूबे में 20 हजार किलोमीटर की लंबाई में स्टेट हाईवे, जिला सड़क व ग्रामीण मार्ग हैं। जो सड़कें अधिक क्षतिग्रस्त हुई हैं औैर जिन पर मलबा आने से आवागमन बाधित है, उनकी मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर तुरंत करने के निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ललित मोहन के अनुसार बारिश और भूस्खलन से हुई क्षति पहले ठीक की जा रही है। रुटीन रिपेयरिंग के कार्य बाद में होंगे। पहले सड़कों को परिवहन लायक बनाया जा रहा है। इसके बाद कोलतार का कार्य बारिश के बाद ही होगा। शासन ने मरम्मत के लिए 50 करोड़ की रकम दी है। इसमें से 42 करोड़ रुपये सूबे के सभी खंडों को आवंटित कर दिए गए हैं।
दैनिक जागरण - 29/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Thursday, September 25, 2008

25 सितम्बर – गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश

25 सितम्बर – राज्य के प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखी जाएगी। हर माह एक जिले का चयन कर स्कूलों का मुआयना होगा। इसके लिए शासन के निर्देश पर परियोजना व महकमे के अफसरों की टीम गठित की गई है। इस माह टिहरी जिले का चयन किया गया है। राज्य में मिड-डे मील का दायरा बढ़ गया है पर इसकी गुणवत्ता पर नजर रखने की व्यवस्था नहीं है। अब इस मामले में लापरवाही हेडमास्टरों व शिक्षकों को भारी पड़ेगा। पहले चरण में जिला व खंड शिक्षा अधिकारियों को रैंडम सैंपलिंग के निर्देश दिए जा चुके हैं। केंद्र ने भी भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर मंथन के बाद यह तय किया गया है कि मिड-डे मील की गुणवत्ता और उसके नियमित मुआयने का व्यवस्था केंद्रीय स्तर पर भी हो। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान राज्य परियोजना व महकमे के पांच विशेषज्ञों की टीम का गठन किया गया है। यह टीम प्रति माह एक जिले का चयन कर वहां मिड-डे मील की गुणवत्ता की असलियत जांचेगी। टीम में राज्य परियोजना निदेशक, मिड-डे मील कार्यक्रम के संयुक्त निदेशक, वित्ता नियंत्रक, शिक्षा विशेषज्ञ, प्रशिक्षण विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। यह टीम जिलों में रैंडम सैंपलिंग के लिए स्कूलों में छापे मारेगी। प्रत्येक जिले में एक-एक ब्लाक संसाधन केंद्र व न्याय पंचायत संसाधन केंद्र के सभी स्कूलों में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। बेसिक शिक्षा अपर सचिव व राज्य परियोजना निदेशक आरके सुधांशु ने कहा कि इस माह टिहरी जिले का चयन किया गया है। टीम जिले का व्यापक मुआयना करेगी। भोजन की गुणवत्ता की जांच का जिम्मा महकमे से इतर संस्था को भी सौंपने पर विचार किया जा रहा है। राज्य के तकरीबन 5017 सरकारी और सहायताप्राप्त अशासकीय माध्यमिक स्कूलों में अध्ययनरत अपर प्राइमरी के सभी 12 लाख छात्र-छात्राओं को मिड-डे मील के दायरे में लाया जा चुका है।
दैनिक जागरण - 25/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

24 सितम्बर - बोर्ड टॉपर्स को पुरस्कार में मिलेगी बड़ी राशि

24 सितम्बर - बोर्ड टॉपर्स को पुरस्कार में मिलेगी बड़ी राशि पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह को भव्य बनाने की कोशिशें ऐनवक्त पर कामयाब रहीं तो हाईस्कूल व इंटर बोर्ड के टाप टेन छात्र-छात्राओं को बतौर पुरस्कार सम्मानजनक राशि मिलेगी। वित्त विभाग ने एक करोड़ के प्रस्तावित बजट में कटौती कर तकरीबन 46 लाख खर्च पर सहमति जता दी है। इसके लिए शासन ने आज नियमावली को भी एपू्रव कर दिया है। बोर्ड के हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट बेहतर रहने पर शिक्षा मंत्रालय ने टापर छात्र-छात्राओं के साथ स्कूलों को भी 'सम्मानजनक' पुरस्कार देने की घोषणा की थी। शिक्षा मंत्री मदन कौशिक की पहल पर महकमे के प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिली पर तकरीबन एक करोड़ के बजट को वित्त विभाग से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। इस मामले को 'दैनिक जागरण' ने 22 सितंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इससे चेते शिक्षा मंत्रालय व शासन के अफसरों ने बजट स्वीकृत कराने पर जोर लगाया। सूत्रों के मुताबिक पुरस्कार वितरण के लिए महकमे की संशोधित नियमावली पर आज शासन ने मुहर लगा दी। प्रयास तेज होने पर वित्त विभाग ने भी समारोह के लिए तकरीबन 46 लाख के बजट पर सहमति जता दी है। नियमावली के मुताबिक बोर्ड मेरिट सूची में इंटर में पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे छात्र-छात्राओं को क्रमश: 21, 15 व 11 हजार, इसी क्रम में हाईस्कूल के बच्चों को क्रमश: 15, 11 हजार व आठ हजार रुपये मिलेंगे। चौथे से दसवें स्थान पर रहने वालों को 5100 रुपये दिए जाएंगे। तीन वर्षो तक इंटर में सर्वश्रेष्ठ रिजल्ट देने में पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर रहे स्कूलों को क्रमश: दस, पांच व तीन हजार और हाईस्कूल में इसी क्रम के स्कूलों को क्रमश: आठ,चार व दो हजार की राशि मिलेगी। आज दिनभर बजट व नियमावली को स्वीकृति तो मिल गई पर एक पेच अभी फंसा ही है। ऐनवक्त पर बजट की पूर्ति आकस्मिकता निधि से ही संभव है। इसके लिए सीएम का एप्रूवल जरूरी है। उनके दिल्ली में होने की वजह से अब बुधवार को इस मामले में अंतिम निर्णय हो सकेगा। यहां बता दें कि गुरुवार को होने वाले सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री ही हैं।
दैनिक जागरण - 24/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Wednesday, September 24, 2008

Vintage water mills are a charm for residents of Kumaon in Uttarakhand

By Ashish GoelKaladungi (Kumon) Uttarakhand, Sep.23 (ANI): A majority of residents in the rural Kumaon region of Uttarakhand continue to use the vintage water-powered mills for grinding purposes.In the remote population in Kaladungi and other areas in Kumaon region people dont want to give up the water powered mills.The British, in the late 19th century, are known to have originally introduced water-powered mill here. Since then residents have found it easy for everyone to get the wheat grinded into flour.One of the reasons stated by residents of rural Kumaon about their preference for the water powered mill is that since there was no electricity in most of the villages in the region, people had to travel distant places for getting the wheat grinded.Besides, with the aid of water powered mill, the mode grinding wheat into flour is quite simple and hence its importance.Water in a channel branched off a stream propels the blades of a waterwheel. The wheel, in turn, sets in motion millstones grinding wheat grain into flour.People from all the nearby villages come here to grind the wheat into flour. The grinder grinds eight to ten quintals of flour everyday. The mill belongs to the British era and the stream was diverted this side for ironsmiths. When the British saw that there was no electricity, they thought of building a mill, which runs with water. Since then this water mill is running,” said Raviraj, the mill owner.“There is no electricity here and in other nearby villages. We come here to the water mill to get the wheat grinded. It’’s been a very long time since we have been coming here,” said Mukesh, a customer.The water powered mill grinds up to 10-15 quintals of wheat everyday.Residents believe that the flour that is grinded from the water-powered mill is good for health.“The flour, which is ground in watermill, is good because the flour from an electric mill has its nutrients lost. So people come here in large number. Around 20-25 people come here everyday to grind their wheat grains,” said Ramesh, a tea vendor.Where on one side the people are getting good quality of the flour from the water powered mill, on the other side, it is also helping in saving the electricity, which is a major problem there. (ANI)
yahooBuzzArticleHeadline = "Vintage water mills are a charm for residents of Kumaon in Uttarakhand";

Source: http://www.thaindian.com/newsportal/india-news/vintage-water-mills-are-a-charm-for-residents-of-kumaon-in-uttarakhand_10099039.html

Tuesday, September 23, 2008

फोटोयुक्त निर्वाचन नामावलियां प्रकाशित

सचिव एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखण्ड श्रीमती राधा रतूडी ने बताया है कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार नये परिसीमन के आधार पर उत्तराखण्ड राज्य की समस्त 70 विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों का 01 जनवरी, 2008 की अर्हता तिथि के आधार पर पुनरीक्षण कर दिनांक 20.09.08 को अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियां दिनांक 20 सितम्बर, 08 से एक सप्ताह की अवधि हेतु समस्त पदाभिहित स्थलों, मतदेय स्थलों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी /उप जिलाधिकारी/तहसील कार्यालयों, जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालयों में जन-साधारण के अवलोकनार्थ उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने समस्त नागरिकों, राजनैतिक दलों के अध्यक्ष/मंत्रियों, मा0 सांसदों /विधान सभा सदस्यों , समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, नगर निकायों के सभासदं, ग्राम प्रधानों एवं अन्य जन प्रतिनिधियों आदि से अनुरोध किया है कि विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों का अवलोकन करते हुए निर्वाचक नामावलियों को शुद्ध एवं अध्यावधिक बनाने में अपना योगदान प्रदान करने की कृपा करें।
उ० सूचना एवं लोक सम्पर्क वि० - 23/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

राज्यकर्मियों को 30 दिन के वेतन के बराबर बोनस

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी ने राज्यकर्मियों, शिक्षण संस्थाओं एवं निकाय के कर्मचारियों के लिए 30 दिन की परिलब्धियों के बराबर तदर्थ बोनस स्वीकृत करने की स्वीकृति प्रदान करते हुए बोनस का संपूर्ण भगतान नकद किये जाने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्यकर्मियों को वर्ष 2007-08 के लिए बोनस दिये जाने के सम्बन्ध में सचिव वित्त श्रीमती राधा रतूडी द्वारा आज शासनादेश निर्गत कर दिया गया है। शासनादेश के अनुसार उत्पादकता से असंबद्ध यह तदर्थ बोनस प्रदेश के सभी अराजपत्रित कर्मचारिय तथा राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं, स्थानीय निकायों तथा जिला पंचायतों को ऐसे कर्मचारियों को देय होगा जिनका वेतनमान अधिकतम रु. 10500 है। बोनस की अधिकतम सीमा 2500 रूपये रखी गई है। जिसके आधार पर पात्रता के दायरे में आने वाले राज्यकर्मियों को अधिकतम रू. 2467 की दर से बोनस का नकद भुगतान कर्मचारियों को उनके बैंक खाते के माध्यम से किया जायेगा। सरकार ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी बोनस स्वीकृत किया है। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में पिछले तीन साल से प्रतिवर्ष कम से कम 240 दिनों तक कार्य करने वाले दैनिक वेतनभेागियों को रू. 1200 की अधिकतम परिलब्धि के आधार पर रू. 1184 की दर से बोनस मिलेगा। .
उ० सूचना एवं लोक सम्पर्क वि० - 23/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Friday, September 19, 2008

गंगा की स्वच्छता में जनभागीदारी महत्वपूर्ण : मु०मं०

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खंडूडी ने भारत माता मंदिर के रजत जयंती समारोह के अवसर पर कहा कि गंगा जल की पवित्रता को बनाये रखना हम सबका परम कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि इसकी स्वच्छता, इसके उदगम स्थल गंगोत्री के समान पूरे उत्तराखंड में बनाये रखने के लिये सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जन की सहभागिता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गंगा जिन-जिन शहरों एवं क्षेत्रों से गुजरती है वहां के लोगों का यह कर्त्तव्य हो जाता है कि वे इसकी स्वच्छता बनाने में अपना पूरा सहयोग दें।

19 सितम्बर – भूकम्प के हिसाब से प्रदेश जोन के चार व पांच में

उत्तरकाशी व चमोली के विनाशकारी भूकंप झेल चुके उत्तराखंड के 10 शहरों की भूंकप दशा कुंडली बनाई जा रही है। इन शहरों में भूकंप की संवेदनशीलता के हिसाब से किए जा रहे रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग के अंतिम परिणाम दिसंबर तक आ जाएंगे। वैज्ञानिकों ने भूकंप प्रभाव संवेदनशीलता के लिहाज से उत्तराखंड को जोन चार व पांच में रखा है। प्रदेश का ऊपरी भाग अधिक व नीचे का भाग अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माना गया है। शहरों के भवनों की वस्तुस्थिति सामने आ जाने के बाद इससे सरकार को आपदा प्रबंधन की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। मसूरी व जोशीमठ शहर में फील्ड वर्क खत्म हो चुका हैं। मसूरी के संकलित आंकड़ों का आरंभिक विश्लेषण भी हो चुका है। इससे पता चला कि मसूरी में 623 भवन भूकंप प्रभाव की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील हैं। जोशीमठ के आंकड़ों के विश्लेषण में प्रगति है। पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी, बागेश्वर व रुद्रप्रयाग के फील्ड वर्क भी समाप्त हो चुका है। टिहरी, पौड़ी, श्रीनगर में फील्ड वर्क अब बरसात के बाद तेज होगा। उत्तराखंड आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के वरिष्ठ अधिशासी गिरीशचंद्र जोशी ने बताया कि शहरी भूकंप घातकता न्यूनीकरण की दृष्टि से राजधानी देहरादून का भी नमूना सर्वेक्षण हो चुका है। इस कलस्टर सर्वे में जान-माल की क्षति के अनुमान लगाया गया है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष समझा जाएगा कि क्या पूर्व प्रबंध होने चाहिए और कम-से-कम नुकसान के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
दैनिक जागरण - 19/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Thursday, September 18, 2008

औद्योगिक पैकेज की समय सीमा 2013 तक बढ़े : राज्यपाल

उत्तराखण्ड के राज्यपाल श्री बी.एल.जोशी ने कहा है कि उत्तराखण्ड के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक पैकेज की समय सीमा वर्ष 2013 तक बढाये जाने की आवश्यकता है। वर्ष 2003 में दस वर्ष के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज को वर्ष 2006 में घटाकर सात वर्ष के लिए कर दिया गया था। राज्यपाल ने कहा कि इस औद्योगिक पैकेज ने राज्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और राज्य के सभी भागों तक इसका लाभ पहचाने के लिए इसकी समय-सीमा 2013 तक किया जाना आवश्यक है।

18 सितम्बर - दिल्ली का सफर फिर होगा कूल-कूल

देहरादून से दिल्ली और हल्द्वानी जाने वाले यात्री एक बार फिर वाल्वो बसों के आरामदायक और कूल-कूल सफर का आनंद उठा सकेंगे। उत्तराखंड परिवहन निगम जल्द ही देहरादून-दिल्ली मार्ग पर तीन और देहरादून-हल्द्वानी मार्ग पर दो बसों का संचालन करेगा। इसके लिए निगम वाल्वो का संचालन करने वाली विभिन्न कंपनियों से जल्द ही निविदाएं आमंत्रित करने जा रहा है। परिवहन निगम की यह बस सेवा अभी तक यात्रियों के जेहन में बसी हुई है। यही कारण है कि वाल्वो की डिमांड एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसके चलते निगम एक बार फिर लंबी दूरी के मार्गो पर वाल्वो बस सेवा फिर से शुरू करने जा रहा है। उत्तराखंड परिवहन निगम ने जनवरी 2005 में विदेशी तकनीक वाली वाल्वो बसों का संचालन शुरू किया। शुरुआती दौर में इन बसों में यात्रियों को समाचार पत्र, स्नेक्स और पानी की बोतल भी मुफ्त बांटी गई। आलम यह था कि आफ सीजन में भी इन बसों में सौ प्रतिशत लोड फैक्टर था। धीरे-धीरे व्यवस्था पटरी से उतरने लगी। कभी बसें समय पर नहीं पहुंचीं तो कभी तकनीकी कारणों के चलते रास्ते में ही खड़ी होने लगीं। इससे निगम की छवि भी धूमिल हुई। इसके चलते निगम ने वाल्वो बसों का संचालन बंद कर दिया। एक बार फिर से इन बसों को संचालित करने पर निगम प्रबंधन सहमत हो चुका है। पहले चरण में पांच वाल्वो बसों को चलाने की बात चल रही है। इनमें से तीन बसें देहरादून से दिल्ली तो दो बसें देहरादून से हल्द्वानी के लिए चलाई जाएंगी। इसके लिए कुछ ही दिनों के भीतर इच्छुक कंपनियों से निविदाएं मंगाई जाएंगी। उप महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने इसकी पुष्टि की है।
दैनिक जागरण - 18/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Thursday, September 11, 2008

10 सितम्बर - दो अक्टूबर से नो पब्लिक स्मोकिंग प्लीज

धूम्रपान के आदी सावधान हो जाएं। दो अक्टूबर से सरकारी, गैर सरकारी इमारतों और सार्वजनिक स्थलों पर सिगरेट, बीड़ी सुलगाने वालों की नकेल कसने की केंद्र ने पूरी तैयारी कर ली है। यह सच है कि इसे सख्ती से लागू करना राज्यों के सहयोग पर निर्भर करेगा, पर केंद्र सरकार इस संबंध में पुलिस अधिकारी, चुनिंदा गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं से लेकर ट्रेन में टिकट चेकरों तक को धूम्रपान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 200 रुपये का जुर्माने करने का अधिकार देने जा रही है। अगर किसी निजी दफ्तर, होटल, डिस्कोथेक, कैंटीन, पब, बार से लेकर सार्वजनिक स्थल में धूम्रपान हुआ तो रोकने की जिम्मेदारी प्रबंधन व बॉस लोगों की होगी। इस जिम्मेदारी से बचना उन्हें महंगा भी पड़ सकता है। तंबाकू नियंत्रण कानून और भारत में संबंधित मुद्दों पर आयोजित दो दिवसीय नेशनल एडवोकेसी वर्कशाप का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. अंबुमणि रामदास ने माना कि यह काम केवल सरकार अकेले नहीं कर सकती है। इसके लिए आम जनता और गैर-सरकारी संगठनों का सक्रिय सहयोग जरूरी है। मालूम हो कि सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान के खिलाफ कानून पहले से ही था पर सरकार इसे अमल में नहीं ला पा रही थी। बाद में कुछ बदलाव किए गए और 30 मई को बाकायदा अधिसूचना जारी कर स्पष्ट कर दिया गया कि इस पर सख्ती से अमल 2 अक्टूबर से शुरू कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने चेताया कि तमाम प्रयासों के बावजूद देश में तंबाकू का सेवन बढ़ रहा है और अब कम उम्र के बच्चे भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को यह बात अच्छी तरह समझनी चाहिए कि 40 प्रतिशत बीमारियां केवल तंबाकू के सेवन के कारण होती हैं। राज्य सरकारें भी 2 अक्टूबर से सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान के खिलाफ मुस्तैद हो जाएं।
दैनिक जागरण - 10/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

11 सितम्बर - पालीटेक्निक:एकमुश्त शुल्क से राहत

सरकारी पालीटेक्निकों के तकरीबन 11 हजार छात्र-छात्राओं को वार्षिक शुल्क की भारी-भरकम राशि एक मुश्त जमा कराने से निजात मिलेगी। शुल्क प्रति सेमेस्टर लिया जाएगा। राज्य के 36 सरकारी पालीटेक्निकों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शुल्क में रियायत तो नहीं दी गई पर भारी शुल्क एक साथ देने की परेशानी दूर की जा रही है। उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव सौंपा था। इस प्रस्ताव पर शासन ने सैद्धांतिक सहमति व्यक्त कर दी है। शासनादेश जल्द जारी किया जाएगा। तय किया गया है कि प्रत्येक विद्यार्थी से वर्ष में दो सेमेस्टर का शुल्क एकमुश्त लेने के बजाए दो किस्तों में वसूल किया जाए। अभी तक छात्र-छात्राओं से बतौर वार्षिक शुल्क 9350 रुपये की राशि एकमुश्त ली जा रही है। इससे विशेष रूप से निर्धन छात्र-छात्राओं को दिक्कत पेश आ रही है। इस वजह से परिषद के प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने में सरकार रजामंद हो गई है। अब प्रत्येक छात्र से एक सेमेस्टर के शुल्क के रूप में 4675 रुपये वसूल किए जाएंगे। इस राशि में ट्यूशन फीस सिर्फ तीन हजार है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए दो सितंबर-07 में जारी शासनादेश में संशोधन किया जाएगा। इस वक्त राज्य के 36 पालीटेक्निकों में करीब 11 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। तकरीबन पांच हजार छात्र-छात्राएं सिर्फ पहले वर्ष में अध्ययनरत हैं। सरकार के इस कदम का लाभ नए व पुराने दोनों ही छात्र-छात्राओं को मिलेगा। जिन पालीटेक्निकों में दूसरी पाली को मंजूरी दी गई है, उनके विद्यार्थी भी इससे लाभान्वित होंगे।
दैनिक जागरण - 11/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

11 सितम्बर - पर्यटन महकमे की वेबसाइट अपडेट करेगा विप्रो

पर्यटन महकमे की वेबसाइट में सुव्यवस्थित जानकारी नहीं मिलने से पर्यटकों व श्रद्धालुओं को मायूस नहीं होना पड़ेगा। महकमे ने अपनी वेबसाइट को अपडेट करने का जिम्मा विप्रो कंपनी को सौंपा है। कंपनी महकमे की जरूरत के हिसाब से नया साफ्टवेयर विकसित करेगी। उत्ताराखंड के पर्यटक स्थलों और उसके बारे में जरूरी जानकारी की अपेक्षा रखने वाले देश-विदेश के पर्यटकों व श्रद्धालुओं को फिलवक्त महकमे की वेबसाइट पर क्लिक करने पर कई जानकारी अधूरी मिल रही हैं। इससे विश्व पर्यटन मानचित्र पर मुकाम बनाने को छटपटा रहे राज्य की छवि पर असर पड़ रहा है। लिहाजा, महकमे ने वेबसाइट को अपडेट करने का जिम्मा विप्रो को सौंपा है। महकमे की योजना के मुताबिक नए पर्यटन सर्किटों व डेस्टिनेशन की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। विप्रो वेबसाइट तैयार करेगा। पर्यटन सचिव राकेश शर्मा ने स्वीकार किया कि वेबसाइट अभी अपडेट नहीं है। विप्रो को नवंबर तक नए साफ्टवेयर के साथ रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जरूरत पड़ी तो नया ट्रांसपोंडर लगाने से गुरेज नहीं किया जाएगा। सैफ गेम्स के मौके पर वेबसाइट व साफ्टवेयर का उद्घाटन करने पर विचार किया जा रहा है। पर्यटक स्थलों के ढांचागत विकास की मुहिम के अंतर्गत चार टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने की योजना को मूर्त रूप दिया जा रहा है। इनमें दोनों मंडलों से दो-दो डेस्टिनेशन चयनित किए गए हैं। गढ़वाल में आसन बैराज से टौंस-यमुना घाटी के मध्य क्षेत्र चकराता और लैंसडौन के पीछे धूमाकोट तक कार्बेट नेशनल पार्क और कुमाऊं में जागेश्वर व पिथौरागढ़ को पर्यटन के नजरिए से विकसित किया जाएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक के कंसल्टेंट करीब एक पखवाड़े तक उक्त क्षेत्र में दौरा करने के बाद प्रोजेक्ट बनाएंगे। सचिव के मुताबिक मुंबई में अप्रवासी उत्ताराखंडियों को जोड़ने के लिए 'कौथीग' के आयोजन पर विचार किया जा रहा है।
दैनिक जागरण - 11/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Monday, September 8, 2008

महिला साक्षरता के लिए सामुहिक प्रयास जरुरी : मु०मं०

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी ने कहा है कि राज्य में शत-प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमें जन आन्दोलन चलाकर कार्य करना होगा, ताकि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे। उन्होंने कहा कि महिला साक्षरता दर में वृद्धि के लिए भी सभी को सामूहिक प्रयास करने होंग। अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक पहुंचे, इसके लिए राज्य के प्रत्येक नागरिक को शिक्षित होना आवश्यक है, ताकि वह सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर इससे लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत प्रदेश में साक्षरता को बढावा देने के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मेजर जनरल खण्डूडी ने साक्षरता के क्षेत्र में कार्य कर रही स्वंयसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनो, जनप्रतिनिधियों आदि से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में साक्षरता को बढाने के लिए कार्य करे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों तथा स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे भी इस महत्वपूर्ण अभियान को नेतृत्व प्रदान कर निरक्षरता को दूर करने के लिए आगे आयें। निरक्षरता को समाज का कलंक बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें राज्य को शत-प्रतिशत साक्षरता की श्रेणी में लाने के लिए जनसहयोग के साथ कार्य करना है, तभी हम इस राज्य को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित कर सकते है। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं तथा महिलाओं में साक्षरता बढाने के लिए कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होने महिला मंगल दलों एवं महिलाओं के कल्याण से जुडी संस्थाओं से भी अनुरोध किया है कि वे महिला साक्षरता को बढाने के लिए आगे आये।
उ० सूचना एवं लोक सम्पर्क वि० - 08/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

08 सितम्बर – सरकार द्वारा 500 आई०टी०आई० अनुदेशकों की नियुक्ति पर विचार

राजकीय आईटीआई में अनुदेशकों के 500 से ज्यादा रिक्त पदों पर नियुक्ति की राह तलाश की जा रही है। नियुक्तियों के लिए पहले शुरू की गई प्रक्रिया को चालू करने के विकल्प को भी आजमाने की तैयारी है। राज्य के 71 राजकीय आईटीआई में नियमित अनुदेशकों के पद काफी संख्या में रिक्त हैं। 360 रिक्त पदों पर भर्ती को वर्ष 2002 और 2005 में प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन अड़ंगा लगने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। पीपीपी मोड में दिए गए आईटीआई में अनुदेशकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विकल्प के तौर पर उद्योगों को संविदा पर नियुक्ति करने का विकल्प खुला रखा गया है। हालांकि, फिलवक्त अनुदेशकों के करीब 500 से ज्यादा पद रिक्त हैं। भर्ती खोलने के लिए सरकार कई पहलुओं पर विचार कर रही है। इंटरव्यू समाप्त कर मेरिट के आधार पर नियुक्तियों के लिए नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। नई नियमावली के मुताबिक भर्ती शुरू करने की स्थिति में पुरानी भर्ती प्रक्रिया समाप्त होने का अंदेशा है। लिहाजा, इसके विकल्प के रूप में पुरानी प्रक्रिया के मुताबिक भर्ती शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। इसमें नया पेच नहीं फंसा तो नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। पुरानी प्रक्रिया चालू करने के मामले में यह भी देखना पड़ेगा कि आवेदकों की वर्तमान में आयु सीमा में छूट दी जाए अथवा नहीं। सूत्रों के मुताबिक पुराने आवेदकों को आयु सीमा में छूट देने के प्रकरण पर उच्च स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा सचिव सुब्रत विश्र्वास के मुताबिक पीपीपी मोड में दिए गए आईटीआई को भी अनुदेशकों की कमी से जूझना पड़ रहा है। इसलिए उद्योगों को संविदा पर नियुक्ति करने की इजाजत पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के पर्यटन सलाहकार प्रकाश सुमन ध्यानी का कहना है कि अनुदेशकों की भर्ती को लेकर सरकार गंभीर है। पंचायत चुनाव की आचार संहिता हटते ही इस संबंध में उच्चस्तरीय बैठक होगी। आईटीआई प्रशिक्षण दुरुस्त करने को कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
दैनिक जागरण - 08/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

06 सितम्बर - साहसिक पर्यटन रोजगार का सशक्त माध्यम: सिंह

संयुक्त निदेशक (साहसिक पर्यटन) एके सिंह ने कहा कि पहाड़ी राज्य में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। साहसिक पर्यटन युवाओं के लिए जहां रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकता है, वहीं सूबे में पर्यटन व्यवसाय का भी एक एक प्रमुख अंग है। उन्होंने प्रदेश के युवाओं से इस क्षेत्र में पहल करने का आहवान किया। संयुक्त निदेशक एके सिंह यहां पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित दस दिवसीय एडवेंचर फाउंडेशन कोर्स के समापन पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन कोर्स के दौरान युवाओं को रैपलिंग, जुमारिंग, रिवर क्रासिंग, फ्रस्ट एड, बुश क्राफ्ट आदि का जो प्रशिक्षण दिया गया है, उसके बूते वे स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। कोर्स के समापन पर प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी किया गया। बालिका वर्ग में दीपमाला प्रथम व ज्योति पंवार द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि बालक वर्ग में आनंद पाल प्रथम व कार्तिकेयन शर्मा दूसरे स्थान पर रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षक मस्तान सिंह भंडारी, अरविंद नेगी, अमित रांगड़, अंजलि गोदियाल, रुपा शाही, सविंदर आदि उपस्थित थे।
दैनिक जागरण - 06/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Friday, September 5, 2008

05 सितम्वर - सूबे में खुलेंगे चार लिंक एआरटी सेंटर

प्रदेश में एचआईवी-एड्स मरीजों को एआरटी की सुविधा नजदीक ही उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने चार लिंक एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड में अभी तक सिर्फ एक ही एआरटी सेंटर दून अस्पताल में संचालित है। प्रदेश के सभी मरीजों को दवा लेने के लिए यहीं आना पड़ता है। मरीजों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सोसायटी ने लिंक एआरटी सेंटर खोलने का निर्णय लिया। प्रदेश में जगह को चिह्नित करते हुए सोसायटी ने प्रस्ताव नाको को भेजा। नाको की टीम ने निरीक्षण के बाद हरी झंडी दे दी। लिंक एआरटी सेंटर हरिद्वार व पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल, नैनीताल के सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल, पौड़ी जिले के श्रीनगर बेस अस्पताल में खोले जाएंगे। इसके लिए मेडिकल अफसर को कलकत्ता ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। इनकी ट्रेनिंग 18 से 20 सितंबर तक होगी। इनमें नैनीताल से डा. नीलांबर भट्ट व डा. शकील अहमद, हरिद्वार से डा. प्रदीप कुमार, पिथौरागढ़ से डा. डीएस धर्मशक्तू, डा. नरेंद्र शर्मा, पौड़ी से डा. शेखर पाल व डा. कलम सिंह बड़ोला को ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। अपर परियोजना अधिकारी डा. डीएन ध्यानी ने बताया कि ट्रेनिंग से लौटने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। डा. ध्यानी ने उम्मीद जताई कि अक्टूबर में लिंक एआटी सेंटर शुरू हो जाएंगे।

source: www.uttaraportal.com

05 सितम्वर - सूबे में खुलेंगे चार लिंक एआरटी सेंटर

प्रदेश में एचआईवी-एड्स मरीजों को एआरटी की सुविधा नजदीक ही उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने चार लिंक एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) सेंटर खोलने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड में अभी तक सिर्फ एक ही एआरटी सेंटर दून अस्पताल में संचालित है। प्रदेश के सभी मरीजों को दवा लेने के लिए यहीं आना पड़ता है। मरीजों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सोसायटी ने लिंक एआरटी सेंटर खोलने का निर्णय लिया। प्रदेश में जगह को चिह्नित करते हुए सोसायटी ने प्रस्ताव नाको को भेजा। नाको की टीम ने निरीक्षण के बाद हरी झंडी दे दी। लिंक एआरटी सेंटर हरिद्वार व पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल, नैनीताल के सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल, पौड़ी जिले के श्रीनगर बेस अस्पताल में खोले जाएंगे। इसके लिए मेडिकल अफसर को कलकत्ता ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। इनकी ट्रेनिंग 18 से 20 सितंबर तक होगी। इनमें नैनीताल से डा. नीलांबर भट्ट व डा. शकील अहमद, हरिद्वार से डा. प्रदीप कुमार, पिथौरागढ़ से डा. डीएस धर्मशक्तू, डा. नरेंद्र शर्मा, पौड़ी से डा. शेखर पाल व डा. कलम सिंह बड़ोला को ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। अपर परियोजना अधिकारी डा. डीएन ध्यानी ने बताया कि ट्रेनिंग से लौटने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। डा. ध्यानी ने उम्मीद जताई कि अक्टूबर में लिंक एआटी सेंटर शुरू हो जाएंगे।
source: www.uttaraportal.com

देहरादून मास्टर प्लान माडल के रुप में बने :मु०मं०

देहरादून महायोजना (मास्टर प्लान) एक मॉडल के रूप में बनना चाहिए, जिसमें भविष्य की आवश्यकताओं, पर्यावरण, जनसंख्या के घनत्व आदि पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। यह निर्देश मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी ने बृहस्पतिवार को देर सायं सचिवालय में देहरादून महायोजना 2025 के नियोजन परिकल्पना अफन्द्रीय विकास के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में उच्चाधिकारियों को दिये।
source: www.uttaraportal.com

राज्य आंदोलनकारी के निधन पर मु०मं० द्वारा दुख व्यक्त

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी ने राज्य आन्दोलनकारी मसूरी निवासी उत्तम मलासी के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने उनकी आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घडी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। मुख्यमंत्री मेजर जनरल खण्डूडी ने कहा कि राज्य आन्दोलन में उत्तम मलासी के योगदान को भुलाया नही जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य आन्दोलन के दौरान श्री मलासी ने जेल यातनाएं सही और आन्दोलन में बढ-चढकर भाग लिया। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि आन्दोलनकारियों का बलिदान व्यर्थ न जाय। हमने उनके सपनों के अनुरूप राज्य का विकास करना है।
उ० सूचना एवं लोक सम्पर्क वि० - 05/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Thursday, September 4, 2008

03 सितम्बर - एसटीएफ के ढांचे को मंजूरी जल्द

उत्तराखंड की विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आधुनिकीकरण और सशक्तिकरण का रास्ता साफ होने वाला है। एसटीएफ के ढांचे को स्वीकृति देने की शासन की ओर से लगभग तैयारी हो चुकी है। इसमें 70 लोगों के ढांचे को स्वीकृत किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश बनने के बाद से उत्तराखंड में लगातार ही अपराधों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। इसी को देखते हुए लगभग दो साल पहले एसटीएफ की स्वीकृति दी गई थी। उद्देश्य यह था कि संगठित अपराधियों पर लगाम कसने के साथ ही आतंकवाद से निपटने की चुनौती भी इनके सिर होगी। साथ ही, पुलिस के लिए कठिनाई का कारण बने मामलों का खुलासा भी एसटीएफ करेगी। स्थापना के बाद से ही एसटीएफ इस काम में जुटी भी लेकिन कोई ढांचा स्वीकृत नहीं होने के चलते टास्क फोर्स पूरी क्षमता और तेजी के साथ काम नहीं कर पा रही थी। एसटीएफ की स्थापना तो बड़े ही जोर-शोर और उम्मीदों के साथ की गई थी लेकिन उस अनुरूप काम नहीं किया गया। यहां तक कि इतने कम समय में ही एसटीएफ ने चार से ज्यादा एसपी को प्रभारी के तौर पर देख लिया। इन प्रभारियों को छह माह का समय भी नहीं मिला कि वे अपनी देख-रेख में काम आगे बढ़ा सकें। यही नहीं, इंस्पेक्टर और कर्मी स्तर पर भी लगातार तबादले होते रहे। इस कारण एसटीएफ अपने नाम के अनुरूप काम नहीं कर पाई। पुलिस मुख्यालय की ओर से एसटीएफ के ढांचे का प्रस्ताव लगभग डेढ़ साल पहले भेजा गया था। जिसे वित्त विभाग की तरफ से एक बार लौटाया भी जा चुका है। बाद में इसमें कतिपय सुधार के बाद प्रस्ताव फिर से भेजा गया। अब इस ढांचे को स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ में अधिकारी और कर्मचारी मिलाकर कुल 70 लोगों के ढांचे की स्वीकृति मिलनी तय मानी जा रही है। इसके बाद यहां पर होने वाली तैनाती अस्थाई तौर पर नहीं होगी। आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था एमए गणपति के मुताबिक एसटीएफ के ढांचे को स्वीकृति मिलने से उसके काम-काज में भारी सुधार होगा।
Source: www.uttaraportal.com

03 सितम्बर - एसटीएफ के ढांचे को मंजूरी जल्द

उत्तराखंड की विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) के आधुनिकीकरण और सशक्तिकरण का रास्ता साफ होने वाला है। एसटीएफ के ढांचे को स्वीकृति देने की शासन की ओर से लगभग तैयारी हो चुकी है। इसमें 70 लोगों के ढांचे को स्वीकृत किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश बनने के बाद से उत्तराखंड में लगातार ही अपराधों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। इसी को देखते हुए लगभग दो साल पहले एसटीएफ की स्वीकृति दी गई थी। उद्देश्य यह था कि संगठित अपराधियों पर लगाम कसने के साथ ही आतंकवाद से निपटने की चुनौती भी इनके सिर होगी। साथ ही, पुलिस के लिए कठिनाई का कारण बने मामलों का खुलासा भी एसटीएफ करेगी। स्थापना के बाद से ही एसटीएफ इस काम में जुटी भी लेकिन कोई ढांचा स्वीकृत नहीं होने के चलते टास्क फोर्स पूरी क्षमता और तेजी के साथ काम नहीं कर पा रही थी। एसटीएफ की स्थापना तो बड़े ही जोर-शोर और उम्मीदों के साथ की गई थी लेकिन उस अनुरूप काम नहीं किया गया। यहां तक कि इतने कम समय में ही एसटीएफ ने चार से ज्यादा एसपी को प्रभारी के तौर पर देख लिया। इन प्रभारियों को छह माह का समय भी नहीं मिला कि वे अपनी देख-रेख में काम आगे बढ़ा सकें। यही नहीं, इंस्पेक्टर और कर्मी स्तर पर भी लगातार तबादले होते रहे। इस कारण एसटीएफ अपने नाम के अनुरूप काम नहीं कर पाई। पुलिस मुख्यालय की ओर से एसटीएफ के ढांचे का प्रस्ताव लगभग डेढ़ साल पहले भेजा गया था। जिसे वित्त विभाग की तरफ से एक बार लौटाया भी जा चुका है। बाद में इसमें कतिपय सुधार के बाद प्रस्ताव फिर से भेजा गया। अब इस ढांचे को स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ में अधिकारी और कर्मचारी मिलाकर कुल 70 लोगों के ढांचे की स्वीकृति मिलनी तय मानी जा रही है। इसके बाद यहां पर होने वाली तैनाती अस्थाई तौर पर नहीं होगी। आईजी अपराध एवं कानून व्यवस्था एमए गणपति के मुताबिक एसटीएफ के ढांचे को स्वीकृति मिलने से उसके काम-काज में भारी सुधार होगा।
Source: www.uttaraportal.com

Tuesday, September 2, 2008

02 सितम्बर - इंजीनियरिंग कालेजों में जुड़ा एक और नाम

सूबे के इंजीनियरिंग कालेजों में सोमवार को एक और नाम जुड़ गया। देहरादून में जीआरडी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट परिसर में जीआरडी इंजीनियरिंग कालेज का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस दौरान कालेज के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सोमवार को कालेज परिसर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि आल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कालेज का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षकों और छात्रों पर ही देश का भविष्य टिका है। ऐसे में शिक्षकों व छात्रों व अभिभावकों को भी राष्ट्रहित में अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति वीके तिवारी ने शिक्षा के क्षेत्र में जीआरडी ट्रस्ट के कार्यो की सराहना की। जीआरडी एकेडमी के चेयरमैन सरदार राजा सिंह ने कहा कि कालेज ने कुछ ही समय में मैनेजमेंट के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसीसे उत्साहित होकर उन्होंने यहां इंजीनियरिंग कालेज शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि कालेज जल्द ही अपनी खास पहचान बना लेगा। इस दौरान कालेज के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम में कंवलजीत सिंह, सुरजीत कौर, डा. रैना, डा. उमा अग्रवाल, लता गुप्ता, डा. कुमुद उपाध्याय, एमएस कालरा, डा. उदयन, जीके गुप्ता, आलोक शर्मा समेत कालेज के छात्र, शिक्षक व अन्य स्टाफकर्मी भी मौजूद रहे।

source: www.uttaraportal.com

02 सितम्बर - इंजीनियरिंग कालेजों में जुड़ा एक और नाम

सूबे के इंजीनियरिंग कालेजों में सोमवार को एक और नाम जुड़ गया। देहरादून में जीआरडी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट परिसर में जीआरडी इंजीनियरिंग कालेज का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस दौरान कालेज के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सोमवार को कालेज परिसर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि आल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कालेज का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षकों और छात्रों पर ही देश का भविष्य टिका है। ऐसे में शिक्षकों व छात्रों व अभिभावकों को भी राष्ट्रहित में अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति वीके तिवारी ने शिक्षा के क्षेत्र में जीआरडी ट्रस्ट के कार्यो की सराहना की। जीआरडी एकेडमी के चेयरमैन सरदार राजा सिंह ने कहा कि कालेज ने कुछ ही समय में मैनेजमेंट के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसीसे उत्साहित होकर उन्होंने यहां इंजीनियरिंग कालेज शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि कालेज जल्द ही अपनी खास पहचान बना लेगा। इस दौरान कालेज के छात्रों ने रंगारंग प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम में कंवलजीत सिंह, सुरजीत कौर, डा. रैना, डा. उमा अग्रवाल, लता गुप्ता, डा. कुमुद उपाध्याय, एमएस कालरा, डा. उदयन, जीके गुप्ता, आलोक शर्मा समेत कालेज के छात्र, शिक्षक व अन्य स्टाफकर्मी भी मौजूद रहे।
source: www.uttaraportal.com

02 सितम्बर - नए पर्वतीय मार्गो पर चलेंगी छोटी बसें

परिवहन निगम पर्वतीय मार्गो पर छोटी बस सेवा शुरू करने जा रहा है। नई व्यवस्था से गढ़वाल और कुमाऊं के कई मार्ग पहली बार बस सेवा से जुड़ जाएंगे। निगम में इस समय सात नई टाटा 709 बसें पहुंच चुकी हैं। अगले दो माह में तकरीबन 120 छोटी व्हील बस की बसें आनी हैं। इसमें से साठ बसें टाटा 709 बसें और साठ बसें 35 सीटर होंगी। हालांकि आचार संहिता के मद्देनजर निगम इन नए मार्गो की सार्वजनिक घोषणा नहीं कर रहा है। परिवहन निगम ने बीते वर्ष पर्वतीय और मैदानी मार्गो के लिए नई बसों के क्रय का प्रस्ताव पारित किया था। इसके तहत निगम ने 180 नई बसें क्रय करने का आर्डर दिया। इसी कड़ी में पहली खेप सात बसों के रूप में देहरादून पहुंच चुकी हैं। अगले सप्ताह सात और बसें देहरादून आनी है। पहली खेप की इन सात बसों में से चार बस हल्द्वानी और तीन बसें देहरादून डिपो में लगाई गई हैं। हल्द्वानी की इन चार बसों में से एक बस का नैनीताल-रुद्रप्रयाग मार्ग पर लगना तय है। इसके अलावा दो बसें नैनीताल से गढ़वाल के मार्गो पर लगाई जाएंगी। एक बस कुमाऊं के पर्वतीय मार्ग पर लगेगी। पैंतीस सीटर बसों में सबसे पहले देहरादून-रुड़की मार्ग पर दो बसें लगाई जाएंगी। अभी तक इस मार्ग पर कोई सीधी सेवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि आचार संहिता के चलते नए मार्गो के संबंध में विभागीय अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। उप महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन का कहना है कि कुछ दिनों के भीतर ही इसका निर्णय ले लिया जाएगा।
source: www.uttaraportal.com

मु० मं० द्वारा आई०ए०एस० परीक्षा में सफल उत्तराखण्ड की छवि को बधाई

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी से उनके सरकारी आवास पर वर्ष 2007 की भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में पूरे देश में 11 वां स्थान प्राप्त करने वाली उत्तराखण्ड की सुश्री छवी भारद्वाज ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा से उत्तराखण्ड का नाम पूरे देश में रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षण के प्रश्चात वे अपनी प्रतिभा से जिस क्षेत्र में भी कार्य करेंगी उसमें अपनी छाप छोडेंगी। मुख्यमंत्री मेजर जनरल खण्डूडी ने सुश्री छवी भारद्वाज के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि भाविष्य में राज्य का नाम वे और अधिक रोशन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्रतिभा, लगन एवं परिश्रम से युवा वर्ग प्रेरणा लेगा। मेजर जनरल खण्डूडी ने उन्हें ‘‘विंग्ज आफ फायर’’ पुस्तक भी भेंट की।

30 अगस्त - उत्तराखंड में नैनो के निर्माण पर लगीं निगाहें

30 अगस्त रुद्रपुर सिंगुर में टाटा मोटर्स के खिलाफ उठ रहा विवाद ठंडा न होता देख उत्तराखंड के नागरिकों की निगाहें ड्रीम लखटकिया कार नैनो के निर्माण के लिए पंतनगर औद्योगिक आस्थान पर टिक गई है। हालांकि कंपनी के स्थानीय अधिकारी हाल फिलहाल ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर रहे हैं। साथ ही इसे कॉरपोरेट स्तर का मामला बताया जा रहा है। टाटा मोटर्स के पास पंतनगर औद्योगिक आस्थान में 976 एकड़ भूमि है। इसे कंपनी ने राज्य सरकार से लीज पर लिया हुआ है। कंपनी आवासीय कालोनी निर्माण के मकसद से 100 एकड़ अतिरिक्त भूमि की मांग कर रही है। यह मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। औद्योगिक आस्थान में टाटा मोटर्स कॉमर्शियल वाहनों का निर्माण कर रही है। यहां सामान ढोने वाले टाटा एस यानी छोटा हाथी तथा पैसेंजर वाले टाटा मैजिक का निर्माण किया जा रहा है। फिलहाल यहां प्रतिदिन 300 वाहन तैयार हो रहे हैं। इससे इतर आम आदमी का कार रखने का सपना पूरा करने वाली टाटा की महत्वाकांक्षी कार नैनो के निर्माण को पश्चिम बंगाल के सिंगुर में कारखाना निर्माणाधीन है। कंपनी इस पर 1500 करोड़ रुपये का निवेश भी कर चुकी है। वहां जमीन के मसले पर बिखेड़ा खड़ा हो गया है। इस पर कंपनी के मुखिया रतन टाटा सिंगुर में नैनो परियोजना बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं। श्री टाटा के बयान ने औद्योगिक जगत में भूचाल ला दिया था। उनके के बयान बाद तो राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक सहित कई अन्य राज्य सरकारों ने टाटा को अपने-अपने प्रदेश में कारखाना लगाने के लिए आमंत्रित भी किया है। चूंकि उत्तराखंड में टाटा का कारखाना पहले से ही है लिहाजा नैनो कार का उत्पादन यहां किये जाने की अटकलें भी लग रही हैं। जानकारों का कहना है, चूंकि औद्योगिक आस्थान में टाटा के पास पर्याप्त भूमि तथा आधारभूत ढांचा मौजूद है, इसलिए ड्रीम कार नैनो के निर्माण को यह कारखाना काफी मुफीद रहेगा। इधर कंपनी के स्थानीय सूत्रों ने यहां कारखाने में नैनो कार के उत्पादन की संभावनाओं से हाल फिलहाल इनकार किया है। उनका कहना है कि यहां कंपनी का कॉमर्शियल वाहन निर्माण का डिविजन है जबकि नैनो एक पैसेंजर कार है।
source: uttaraportal.com