Wednesday, October 7, 2015

Uttarakhand Patwari Lekhpal Recruitment 2015

Department of Revenue and Board of Revenue for State Government of Uttarakhand are going to announce a recruitment notice to fill various vacant posts in their department. As per the information there are total 1644 vacant posts of Uttarakhand Patwari & Lekhpal in different department. Out of this 1644 post 1261 are for Patwari post and 428 posts are for Lekhpal post. After seeing this advertisement big number of candidates wants to apply for this recruitment. Application forms are invited from the eligible candidate in prescribed format by the selection board.

Candidate willing to apply for Uttarakhand Patwari and Lekhpal Recruitment must have posses minimum required qualification. Applicant having the required eligibility criteria should apply for this recruitment by filling up the application form available on the official website www.revenue.uk.gov.in. Starting date for the registration of Application form is 22nd October and last date for the registration of Application form is 10th November.  Date of the written examination will be schedule to be held on 27th December 2015.

  • Name of the post: Patwari & Lekhpal
  • Total Post: 1644
  • Application mode: Online
  • Initial Date: 22nd September
  • Final Date: 10th November
  • Application Fees: Rs:300/- for General and Rs.150/- for Reserved candidate
  • Age limit: 21 to 28 Years for Patwari post and 21 to 35 year for Lekhpal
  • Eligibility: Graduation in the relevant stream
  • Selection process: Physical Test, Written Exam, Medical Test and Document Verification
  • Date of PET test: 15th to 20th December 2015
  • Date of Written Examination: 27th December 2015
  • Date of Declaration of Result: 15th January 2015
  • Date of Medical Test and Document Verification: up to 15th February 2015
  • Website: www.revenue.uk.gov.in

Thursday, September 24, 2015

New campaign to save Uttarakhand’s villages

DEHRADUN: Uttarakhand's villages are dying, their residents leaving for other parts. Now Anil Joshi, well known environmentalist, is taking along people from various sections of society on a statewide campaign, travelling from village to village to prepare a charter based on the grievances and expectations of residents. The campaign, titled 'Gaon Bachao' (Save the villages) will cover more than 20 centrally-located rural settlements across all 13 districts.

The massive campaign will conclude in Dehradun on October 14. Joshi has much to say on the crisis that moved him to begin it.

"Villagers feel completely disillusioned. More than 3,600 villages have been completely abandoned, while 40% of our rural population has moved to cities for better education, health and employment facilities in the last 15 years. The state government did not make any efforts to get them back. In the statehood agitation, the villagers contributed equally. But it is they who have suffered either because of all the development limited to the cities or projects such the 556 hydel plants, or all the stone crusher units built without their consent."

Unlike another neighboring hill state, Himachal Pardesh, Uttarakhand either has no hospital in many villages or no doctors in these hospitals, points out Joshi. The schools are in pitiable condition.
"The public partnership model of the government has affected the villagers' interests. Migration has created political imbalance because of delimitation," Joshi counts the ill-effects of these changes.

He adds that his campaign is turning into the second biggest the state has seen after the statehood movement, with "sulking" villagers waking up to fight for their rights. "Political parties who remain aloof to our needs will be held accountable in the state assembly elections in 2017," he warns.

The women of the state, who participated equally with men in all the agitations will be taken along, according to Kamla Pant, representative of Uttarakhand Mahila Manch. Dwarika Semwal, another social activist from Uttarkashi alleged that the real objective behind the statehood agitation — development in the hills — had been utterly defeated. "The villagers feel completely cheated. So they have to wage another big movement for their rights."

Flash Points

The issues Joshi is discussing with villagers

-There has been negligible concrete plan based on forest, water, soil and air

-Some 70,000 hectares agriculture land has been lost

-In Uttarakhand, which has 9% development rate, around 32.89 lakh villagers live on a meagre Rs 17 a day

- Some 1,800 primary schools are on the verge of closure because of scant presence of students. As many as 2020 schools are at risk, with 824 in dilapidated state and 1,196 in need of repair in a state situated on seismic zones 4 and 5 -Political parties must explain their plan regarding decentralization as per 74th amendments

- No policy to reduce unemployment. Some eight lakh youth are registered as jobless

- 5,000 villages have no roads 

TOI

Wednesday, September 23, 2015

उत्तराखंड में पटवारी के 550 पदों पर भर्ती

देहरादून

प्रदेश में युवाओं को रोजगार का एक बड़ा मौका हासिल होने जा रहा है। सरकार पटवारी के 550 से ज्यादा पदों के लिए गुरुवार से भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने जा रही है। इनमें से लगभग 150 पद विभागीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति के जरिए भरे जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया जिलावार संपन्न की जाएगी।

उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में पटवारियों का अहम योगदान है। खासकर पर्वतीय जिलों में भूमि संबंधी कार्यो के साथ ही पटवारियों के पास कानून व्यवस्था का जिम्मा भी है। विषम परिस्थितियों के बावजूद वे अपने इस दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। हालांकि, पर्वतीय इलाकों में स्थिति यह है कि पटवारियों के सैकड़ों पदों के रिक्त रहने से एक-एक पटवारी के पास दो-दो, तीन-तीन क्षेत्रों का जिम्मा है। यही वजह भी है कि पटवारी
महासंघ लंबे समय से रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग करता आ रहा है। पटवारियों के पद खाली रहने से आ रही दिक्कतों को देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले दिनों पटवारियों के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की बात कही थी।

पटवारियों की भर्ती राज्य में बारह वर्षो बाद की जा रही है। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2003 में पटवारियों को भरने के लिए प्रक्रिया संपन्न कराई गई, जो खासी विवादित भी रही थी। उसके बाद अब जाकर सरकार ने पटवारियों के खाली पद भरने को तवज्जो दी है। राज्य में पटवारियों व लेखपालों के कुल 1644 पद हैं। इनमें पटवारियों के 1216 व लेखपालों के 428 पद शामिल हैं। पटवारी राजस्व कार्यो के साथ पुलिस कार्यो को भी
अंजाम देते हैं जबकि लेखपाल केवल राजस्व कार्यो को। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्तमान में राज्य में पटवारियों के कुल 934 सर्किल हैं।

राजस्व महकमे से प्राप्त ब्योरे के मुताबिक वर्तमान समय में पटवारियों के लगभग 400 पद रिक्त हैं, जबकि लेखपालों के रिक्त पदों की संख्या लगभग 150 है। यानी कुल मिलाकर लगभग 550 रिक्त पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया होनी है। इनमें से लगभग चार सौ पद सीधी भर्ती के हैं और डेढ़ सौ पद विभागीय पदोन्नति से भरे जाएंगे। शासन भर्ती प्रक्रिया किसी एजेंसी के बजाए स्वयं ही जिलावार संचालित करेगा। यानी, प्रत्येक जिले में रिक्त पदों पर अलग-अलग भर्ती की जाएगी। सचिव राजस्व डीएस गब्र्याल के मुताबिक पटवारी भर्ती प्रक्रिया गुरुवार
से जिलावार आरंभ की जा रही है और लगभग 550 पदों पर भर्ती की जाएगी।


'सरकार ने पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दे दिए थे और अब गुरुवार से भर्ती प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। रिक्त पद भरने से लंबे समय से आ रही दिक्कतें भी दूर हो जाएंगी।'

-यशपाल आर्य, राजस्व मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

Danik Jagran 23-9-15

उत्तराखंड सीएम से मिला अडानी ग्रुप, बड़े निवेश की तैयारी

उत्तराखंड में निवेश की तैयारी कर रहे अडानी औद्योगिक समूह के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने अपनी योजनाओं का खाका पेश किया। इस मशहूर औद्योगिक घराने ने सोलर प्लांट के अलावा कूड़े से बिजली बनाने वाले संयत्र लगाने का प्रस्ताव भी रखा। बुधवार को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शासन के वरिष्ठ अफसरों के साथ बैठक करेंगे।

बीजापुर स्टेट गेस्ट हाउस में अडानी औद्योगिक समूह की टीम ने उत्तराखंड में उद्योग स्थापित करने की संभावनाओं पर सीएम से वार्ता की। इस दौरान सीएम के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत, मुख्य सचिव राकेश शर्मा समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

अडानी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने बताया कि कंपनी राज्य में एक हजार मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाना चाहती है। इसके अलावा समूह ने खाद्य प्रसंस्करण, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने के लिए भी इच्छा व्यक्त की। खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अडानी ग्रुप का बड़ा काम है। हिमाचल का ज्यादातर सेब यही ग्रुप खरीदता है।

Amar ujala

राज्य स्थापना दिवस पर दिया जाएगा शिल्प रत्‍‌न पुरस्कार

सीएम हरीश रावत ने कहा है कि पहाड़ों की तस्वीर शिक्षा, खेती व हस्तशिल्प से बदल सकती है. कहा कि अक्टूबर महीने तक कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं रहेगा. लेकिन बच्चों को पेरेंट्स स्कूल के भरोसे न छोड़कर खुद पढ़ाई के लिए आगे आना होगा. उच्च शिक्षा के लिए इंस्टीट्यूशंस खोले जा रहे हैं. लेकिन बच्चे मानकों को पूरा करने से वंचित हो रहे हैं.

सुरक्षा दीवार तीन साल में होगी पूरी

ट्यूजडे को सीएम हरीश रावत चमोली जिले के देवराड़ा मेले में पहुंचे. जहां उन्होंने कहा कि हरियाली को कायम रखने के लिए प्लांटेशन जरूरी है. इसी से बंदरों व लंगूरों से निजात पाई जा सकती है. बंदरों व सुअरों को रोकने के लिए सुरक्षा दीवारों का काम तीन साल तक पूरा हो जाएगा. इस मौके पर सीएम ने सिदोली में एलोपैथिक अस्पताल की स्वीकृति, बौला श्रीकोट में एएनएम सेंटर खोलने, आंगनबाड़ी केंद्र, गौचर में सिदोली मोटर मार्ग का डामरीकरण, गौचर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों के पद सृजित करने जैसी कई मांगों पर अपनी घोषणा की. उन्होंने वीर बालिका बीना की स्मृति में पर्यावरण पुरस्कार के लिए दो लाख रुपए, देवराड़ा मेले के लिए तीन लाख, मेले स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए एक लाख, धनपुर तांबा खान के सर्वे के लिए नौ नवंबर से शिल्प रत्‍‌न पुरस्कार देने की घोषणा की. इस मौके पर विधानसभा उपाध्यक्ष एपी मैखुरी, केदारनाथ विधायक शैलारानी रावत, पूर्व विधायक अनिल नौटियाल सहित तमाम अधिकारी मौजूद थे. 

Jagran

अब प्राइवेट परीक्षाओं में मिलेंगी किताब, लगेगी क्लास

अब उत्तराखंड प्रदेश में होने वाली प्राइवेट परीक्षाओं में किताबें भी मिलेंगी और कक्षाएं भी होंगी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पास यह जिम्मेदारी आते ही शिक्षा की सूरत बदल जाएगी।

मुक्त विवि डिस्टेंस मोड में यह पढ़ाई कराएगा और इसी के मुताबिक छात्रों को किताबें उपलब्ध कराएगा। 24 सितंबर को मुक्त विवि को यह जिम्मेदारी मिलने पर अंतिम फैसला होना है।

प्रदेश में अब तक होने वाली प्राइवेट परीक्षाओं में साल में एक बार आवेदन पत्र भरे जाते थे और बिना किसी किताब के सीधे मॉडल पेपर पढ़कर छात्र परीक्षा देते थे। न तो कोई सिलेबस की छात्रों को जानकारी होती थी और न ही कक्षाओं या एसानइमेंट की।

मुक्त विवि के पास प्राइवेट परीक्षाओं की जिम्मेदारी आते ही इसमें बड़ा बदलाव हो जाएगा। छात्रों को बाकायदा एडमिशन लेना होगा। उन्हें पढ़ाई के लिए किताबें भी मिलेंगी और सप्ताह में दो दिन कक्षाएं भी होंगी।

मुक्त विवि अपने छात्रों को शनिवार और रविवार को कक्षा में जाने का विकल्प देता है। इसके अलावा छात्रों को हर सेमेस्टर में एसाइनमेंट भी बनाकर जमा करने होंगे। निश्चित तौर पर इससे बदलाव आएगा।

Amar Ujala

Monday, September 21, 2015

Uttarakhand to give dole to 145 short people across state

 NAINITAL: Setting an example for the rest of the country, the Uttarakhand directorate of social welfare has identified 145 people less than four feet in height across 12 districts of the state and will be giving them financial assistance of Rs 800 a month. The eligible short persons need to be at least 21 years old.

The identification process is still going on in Udham Singh Nagar because of the more complex logistics involved in that district, officials told TOI on Saturday. The district has one of the largest populations in the state and is a business hub. As it borders Uttar Pradesh, people freely move to and from from the district.

In June this year, in an unprecedented step, the Uttarakhand government had proposed financial assistance for adults in the state shorter than four feet, as they "face a lot of difficulties in their day-to-day lives". The decision was taken in a departmental meeting presided over by chief minister Harish Rawat on June 3. A letter dated June 22 was sent to all districts by the social welfare department asking that a list of all eligible people in their respective zones be prepared on a priority basis.

Vishnu Singh Dhanik, director of social welfare, said, "Twelve districts have submitted their data, while Udham Singh Nagar will be submitting it soon. Eligible residents from all the districts will be paid a monthly assistance of Rs 800."

Tehri district tops the list so far, with 36 such people, followed by Pauri (25), Uttarkashi (19), Nainital (19), Rudraprayag (12), Almora (9), Pithoragarh (8), Champawat (5), Dehradun (4), Haridwar (4) and Bageshwar (4), according to officials.

"As soon as we get the data from Udham Singh Nagar, it will be sent to higher authorities for further implementation. I hope this scheme will at least be of some assistance to these people," Dhanik added.

According to doctors, there might be more than 200 distinct medical conditions responsible for the occurrence of dwarfism, including hormonal imbalance. No sure-shot cure is available for the condition till date.


TOI