Wednesday, April 3, 2013

उत्तराखंड: जो 27 साल से हैं, वही स्थायी निवासी

सात साल बाद जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनाए जाने का रास्ता साफ कर दिया गया है। सरकार ने राज्य में वर्ष 1985 से रह रहे हर व्यक्ति को स्थायी निवासी मान लिया है।

राज्य गठन की तिथि (9 नवंबर 2000) को स्थायी निवासी की कट आफ डेट तय की गई है। यानी 9 नवंबर 2000 से 15 साल पहले से रहने का साक्ष्य देने पर अब स्थायी निवास का प्रमाणपत्र हासिल किया जा सकेगा।
 
इसके बनने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग जाति प्रमाण पत्र भी बनवा सकेंगे। पिछले सात साल से मैदानी जनपदों में इन प्रमाण पत्रों पर रोक लगी हुई है।

मुख्य सचिव आलोक कुमार जैन ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने यह फैसला लिया है। हालांकि डबल बेंच में इस आदेश के विरुद्ध एक याचिका लंबित है।

स्थायी निवासी के लिए सरकार ने प्रदेश की सीमा में पिछले 15 साल से निवासरत रहने का मानक सन् 2001 में बनाया था। निकाय चुनाव से ऐन पहले सरकार के इस फैसले से देहरादून (जौनसार क्षेत्र को छोड़ कर), हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल के मैदानी इलाकों के लोगों को राहत मिल सकेगी।

जाति प्रमाण पत्र न बनने की दिक्कतों के चलते ही मैदानी जनपदों में तमाम लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो जा रहे हैं। अब उन्हें इसका लाभ मिल सकेगा।

कौशिक कमेटी ने भी यही सुझाया था
भाजपा सरकार में जाति और निवास प्रमाण पत्र के संबंध में बनी मदन कौशिक कमेटी ने भी 9 नवंबर 2000 कट आफ डेट संस्तुत की थी। नव गठित राज्य छत्तीसगढ़ और झारखंड का अध्ययन करने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विधानसभा में रखी थी।

सेना भर्ती में मिलेगी राहत
इस फैसले से मैदानी जनपदों के युवाओं को सेना भर्ती में होने वाली दिक्कत से अब छुटकारा मिल जाएगा। युवाओं को प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है। जिससे उन्हें भर्ती रैली से बाहर होना पड़ रहा था। भर्ती में उत्तराखंड मूल के युवाओं के लिए पद आरक्षित होते हैं, जिसका लाभ उन्हें मिलता है जिनके पास स्थायी निवास और जाति प्रमाण पत्र हो।

उत्तराखंड मूल के युवाओं को इन प्रमाण पत्रों से लंबाई में छूट का फायदा मिलता है। चार मैदानी जनपदों में सरकार ने मूल निवासी होने को लेकर जारी किए जाने वाले प्रमाण पत्र पर अप्रत्यक्ष तौर पर रोक लगा रखी थी। अब सरकार के कट ऑफ डेट निर्धारित करने के फैसले से उत्तराखंड मूल के युवाओं को राहत मिलेगी।

amarujala

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