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Thursday, June 11, 2015

अर्जी पढ़कर देवता मनोकामना करते हैं पूरी, भक्त चढ़ाते हैं घण्टी - अल्मोड़ा गोलू देव का मन्दिर

अपनी अलौकिक छटा के कारण पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध उत्तराखण्ड धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. यहां के पावन तीर्थों के कारण ही इसे देव भूमि पुकारा जाता है और यहां के विशेष मंदिर और उनकी कथाएं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.

अल्मोड़ा जिले में दुनिया का अपने आप में ऐसा ही एक अनोखा चित्तई स्थित गोलू देव का मन्दिर है. इसके बारे में कहा जाता है कि दुनिया में किसी मन्दिर में इतनी घंटियां नहीं चढ़ायी गयी हैं, जितने अकेले गोलू देव के मंदिर में मौजूद हैं. वहीं इस मंदिर में भगवान का फरियादी की अर्जी पढ़कर मनोकामना पूरी करना भी इसे बेहद खास बनाता है.

इस मंदिर की मान्यता न सिर्फ देश बल्कि विदेशों तक में है. इसलिए यहां दूर-दूर से सैलानी और श्रद्धालु आते हैं. इस मंदिर में प्रवेश करते ही यहां अनगिनत घंटियां नजर आने लगती हैं. कई टनों में मंदिर के हर कोने-कोने में दिखने वाले इन घंटे-घंटियों की संख्या कितनी है, ये आज तक मन्दिर के लोग भी नहीं जान पाए. आम लोगों में इसे घंटियों वाला मन्दिर भी पुकारा जाता है, जहां कदम रखते ही घंटियों की कतार शुरू हो जाती हैं.

दरअसल यहां मन्नते पूरीं होने पर घंटियां चढ़ाने की परम्परा है और ये घंटियां इस बात की भी तस्दीक करती हैं कि यहां कितने भारी पैमाने पर लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं. खास बात है कि इन घंटियों को मन्दिर प्रशासन गलाकर, बेचकर या फिर दूसरे कार्यों में इस्तेमाल नहीं करता. बल्कि इसे भगवान की धरोहर मानकर सहेजा जाता रहा है.

अल्मोड़ा गोलू देव का मन्दिर


मंदिर प्रांगण में जो घंटियां नजर आती हैं, असल में उनकी संख्या और भी ज्यादा है, जिन्हें क्रमवार निकाल कर सुरक्षित रखा जाता है, ताकि मंदिर में और घंटे-घंटियां लगाने की जगह बनी रही.

गोलू देवता को उत्तराखण्ड में न्याय का देवता कहा जाता है. इनके बारे में यह मान्यता है कि जिसको कहीं पर भी न्याय नहीं मिले वह इनके दरबार में अर्जी लगाये तो उससे तुरन्त न्याय मिल जाता है. यही वजह है कि मंदिर में अर्जियां लगाने की भी परम्परा है. कोने-कोने से आये श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए बड़ी संख्या में अर्जियां लिखकर यहां टांग जाते हैं, जिन्हें मन्दिर में देखा जा सकता है.

कहा जाता है कि इन अर्जियों को पढ़कर गोलू देवता मनोकामना पूर्ण करते हैं और श्रद्धा स्वरूप भक्त यहां घंटियां चढ़ाते हैं. यही वजह है कि इस मन्दिर को कई लोग अर्जियों वाला मन्दिर भी पुकारते हैं.

- इनपुट IANS

Thursday, September 18, 2008

औद्योगिक पैकेज की समय सीमा 2013 तक बढ़े : राज्यपाल

उत्तराखण्ड के राज्यपाल श्री बी.एल.जोशी ने कहा है कि उत्तराखण्ड के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक पैकेज की समय सीमा वर्ष 2013 तक बढाये जाने की आवश्यकता है। वर्ष 2003 में दस वर्ष के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज को वर्ष 2006 में घटाकर सात वर्ष के लिए कर दिया गया था। राज्यपाल ने कहा कि इस औद्योगिक पैकेज ने राज्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और राज्य के सभी भागों तक इसका लाभ पहचाने के लिए इसकी समय-सीमा 2013 तक किया जाना आवश्यक है।

Tuesday, September 2, 2008

मु० मं० द्वारा आई०ए०एस० परीक्षा में सफल उत्तराखण्ड की छवि को बधाई

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खण्डूडी से उनके सरकारी आवास पर वर्ष 2007 की भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में पूरे देश में 11 वां स्थान प्राप्त करने वाली उत्तराखण्ड की सुश्री छवी भारद्वाज ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा से उत्तराखण्ड का नाम पूरे देश में रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षण के प्रश्चात वे अपनी प्रतिभा से जिस क्षेत्र में भी कार्य करेंगी उसमें अपनी छाप छोडेंगी। मुख्यमंत्री मेजर जनरल खण्डूडी ने सुश्री छवी भारद्वाज के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि भाविष्य में राज्य का नाम वे और अधिक रोशन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्रतिभा, लगन एवं परिश्रम से युवा वर्ग प्रेरणा लेगा। मेजर जनरल खण्डूडी ने उन्हें ‘‘विंग्ज आफ फायर’’ पुस्तक भी भेंट की।