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Saturday, October 11, 2008

आनलाइन मानीटरिंग को तैयार उत्तराखंड

उत्तराखंड में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की सूबे व देश की राजधानी से आनलाइन मानीटरिंग की तैयारी पूरी हो चुकी है । सूबे के सभी जिलों के विशेष साफ्टवेयर के तहत राष्ट्रीय नेटर्वक से जुड जाने के बाद अब योजना के बारे में दिल्ली तक कंम्यूटर पर ताजी स्थिती देखी जा सकती है और वीडियों कांफ्रेसिंग के जरिए सीधे जिलों से पूछताछ की जा सकती है । केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना के लिए सभी जिलों में ‘मैनेजमेंट इफार्मेशन सिस्टम’ बनाने और योजना से संबंधित सभी तरह की सूचनाएं इसके लिए बनाए गए विशेष ‘एमसीआरडी साफ्टवेयर ‘ में फीड करने के निर्देश दिए गए थे । राष्ट्रीय नेटर्वक से जुड कर उत्तराखंड रोजगार गारंटी योजना की आनलाइअन मानीटरिंग वाले देश के 10 राज्यों में शामिल हो गया है । आनलाइन मानीटरिंग सबसे पहले कर्नाटक मे हुई थी । योजगार गारंटी योजना को पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय नेटर्वक की इस व्यवस्था में रोजगार पाने वाले श्रमिकों के मस्टर रोल के इलेक्ट्रानिक रिकार्ड रखने वाले व मजदूरी का भुगतान बैक खाते के जरिए करने का प्रावधान किया गया है । योजना को पारदर्शी व बहु उपयोगी बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अनुश्रवण समिती के अलावा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार गारंटी परिषद का गठन हुआ है । इससे भी आगे बढ़्कर आम आदमी के लिए जिले मे टोल –फ्री नंबर उपलब्ध कराने कि योजना अगले ह्फते से सूबे के सबी जिलों मे लागू हो जाएगी ।
Soruce: www.utttaraportal.com

Friday, October 3, 2008

01 अक्टूबर - साइंस पार्क को मिली 5.247 हेक्टेयर भूमि

शासन ने देहरादून में बनने वाले साइंस एंड टेक्नालाजी पार्क के लिए विकासनगर तहसील के अंतर्गत झाझरा गांव में 5.247 हेक्टेयर भूमि के हस्तांतरण की अनुमति दे दी है। प्रमुख सचिव एनएस नपलच्याल की ओर से देहरादून के जिलाधिकारी को सूचित किया गया है कि यह भूमि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हस्तांतरित की गई है।
दैनिक जागरण - 01/10/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Friday, September 19, 2008

गंगा की स्वच्छता में जनभागीदारी महत्वपूर्ण : मु०मं०

मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चन्द्र खंडूडी ने भारत माता मंदिर के रजत जयंती समारोह के अवसर पर कहा कि गंगा जल की पवित्रता को बनाये रखना हम सबका परम कर्त्तव्य है। उन्होंने कहा कि इसकी स्वच्छता, इसके उदगम स्थल गंगोत्री के समान पूरे उत्तराखंड में बनाये रखने के लिये सरकारी प्रयासों के साथ-साथ आम जन की सहभागिता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गंगा जिन-जिन शहरों एवं क्षेत्रों से गुजरती है वहां के लोगों का यह कर्त्तव्य हो जाता है कि वे इसकी स्वच्छता बनाने में अपना पूरा सहयोग दें।

19 सितम्बर – भूकम्प के हिसाब से प्रदेश जोन के चार व पांच में

उत्तरकाशी व चमोली के विनाशकारी भूकंप झेल चुके उत्तराखंड के 10 शहरों की भूंकप दशा कुंडली बनाई जा रही है। इन शहरों में भूकंप की संवेदनशीलता के हिसाब से किए जा रहे रैपिड विजुअल स्क्रीनिंग के अंतिम परिणाम दिसंबर तक आ जाएंगे। वैज्ञानिकों ने भूकंप प्रभाव संवेदनशीलता के लिहाज से उत्तराखंड को जोन चार व पांच में रखा है। प्रदेश का ऊपरी भाग अधिक व नीचे का भाग अपेक्षाकृत कम संवेदनशील माना गया है। शहरों के भवनों की वस्तुस्थिति सामने आ जाने के बाद इससे सरकार को आपदा प्रबंधन की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। मसूरी व जोशीमठ शहर में फील्ड वर्क खत्म हो चुका हैं। मसूरी के संकलित आंकड़ों का आरंभिक विश्लेषण भी हो चुका है। इससे पता चला कि मसूरी में 623 भवन भूकंप प्रभाव की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील हैं। जोशीमठ के आंकड़ों के विश्लेषण में प्रगति है। पिथौरागढ़, नैनीताल, उत्तरकाशी, बागेश्वर व रुद्रप्रयाग के फील्ड वर्क भी समाप्त हो चुका है। टिहरी, पौड़ी, श्रीनगर में फील्ड वर्क अब बरसात के बाद तेज होगा। उत्तराखंड आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के वरिष्ठ अधिशासी गिरीशचंद्र जोशी ने बताया कि शहरी भूकंप घातकता न्यूनीकरण की दृष्टि से राजधानी देहरादून का भी नमूना सर्वेक्षण हो चुका है। इस कलस्टर सर्वे में जान-माल की क्षति के अनुमान लगाया गया है। सर्वेक्षण के निष्कर्ष समझा जाएगा कि क्या पूर्व प्रबंध होने चाहिए और कम-से-कम नुकसान के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
दैनिक जागरण - 19/09/2008 [प्रादेशिक समाचार]

Thursday, September 18, 2008

औद्योगिक पैकेज की समय सीमा 2013 तक बढ़े : राज्यपाल

उत्तराखण्ड के राज्यपाल श्री बी.एल.जोशी ने कहा है कि उत्तराखण्ड के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा घोषित औद्योगिक पैकेज की समय सीमा वर्ष 2013 तक बढाये जाने की आवश्यकता है। वर्ष 2003 में दस वर्ष के लिए घोषित औद्योगिक पैकेज को वर्ष 2006 में घटाकर सात वर्ष के लिए कर दिया गया था। राज्यपाल ने कहा कि इस औद्योगिक पैकेज ने राज्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और राज्य के सभी भागों तक इसका लाभ पहचाने के लिए इसकी समय-सीमा 2013 तक किया जाना आवश्यक है।